Resistance की परिभाषा, प्रकार, कार्य और उपयोग

प्रतिरोध (Resistance) क्या हैं इसका SI मात्रक क्या हैं
प्रतिरोध के प्रकार
प्रतिरोध को कैसे मापने है
प्रतिरोध के कार्य
प्रतिरोध के उपयोग
प्रतिरोध के लाभ
प्रतिरोध के नुकसान

Resistance की परिभाषा

प्रतिरोध (Resistance) – यह एक passive electrical component होता हैं जो किसी circuit में हो रहे electric current को flow होने से रोकता हैं।

इसी रुकावट को प्रतिरोध या resistance कहते हैं और इस component को resistor कहते हैं इसको R से प्रदर्शित कर है इसका SI मात्रक ohm (Ω) होता हैं l

Symbol

“जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो चालक विद्युत धारा के मार्ग में रुकावट डालता है। इसे चालक का प्रतिरोध कहते है।”

इसके दो word होते हैं resistance और resistor में अन्तर बस इतना है कि resistance एक राशि है और resistor resistance पैदा करने वाली device होती है हिंदी में दोनो का मतलब प्रतिरोध ही होता हैं।

प्रतिरोध के प्रकार

Resistor दो प्रकार के होते हैं।

  • Fixed resistor
  • Variable resistor
  1. Fixed resistor – इसकी resistance value fixed होती हैं।
  2. Variable resistor – इसकी resistance value को कम ज्यादा किया जा सकता हैं।
  • Fixed Resistor – फिक्स रेजिस्टर वो रजिस्टर होता हैं जिसका रेजिस्टेंस मान फिक्स होता हैं किसी भी सर्किट में फिक्स मान वाले रेजिस्टेंस की जरूरत पड़ती हैं वहां फिक्स रजिस्टर को यूज करते हैं इसका रेजिस्टेंस फिक्स इसलिए होता हैं क्योंकि फिक्स रजिस्टर बनाते समय इसका मान निर्धारित कर दिया जाता हैं यह 2 पिन के होते हैं।
  • Variable Resistor – वेरिएबल रिजिस्टर वो रजिस्टर होते हैं जिनकी मान काम ज्यादा किया जा सकता हैं इसमें रिजिस्टर के रेजिस्टेंस को adjest किया जाता हैं हमे इनकी knob को rotate करना होता हैं उसी से इसका मान fixed करते हैं इसे टेलीविजन में भी use किया जाता हैं volume कम ज्यादा करने के लिए इसे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में भी अपनी जरूरत के अनुसार value कम ज्यादा करने के लिए use करते हैं यह 2 पिन (टर्मिनल) और 3 पिन के होते हैं

Resistance को कैसे मापते है

किसी भी रिजिस्टर का रेजिस्टेंस मापने के कई तरीके होते है जैसे उसके कलर कोड का यूज करके उसका मान पता कर सकते है या फिर मल्टीमीटर का यूज से भी रेजिस्टेंस चैक कर सकते है या तो रिजिस्टर का रेजिस्टेंस मापने के लिए ohm के नियम का use भी कर सकते है।

किसी भी रिजिस्टर का रेजिस्टेंस उसके कलर कोड से चैक करने के लिए रजिस्टर में अलग अलग कलर की पट्टियां होती है इसी कलर कोड का यूज करके मान निकाला जाता है ।

मल्टी मीटर के उपयोग करके रिजिस्टर का रेजिस्टेंस पता करने के लिए सबसे पहले मल्टी मीटर को Ω के सिंबल पर सेट करना होता है उसके बाद रिजिस्टर की दोनो टर्मिनल ( पिन) पर मल्टी मीटर की दोनो टर्मिनल ( प्रोब) रखनी होती है फिर मल्टी मीटर की डिस्प्ले पर आपको जो दिखाई देगा वही इसका रेजिस्टेंस होगा।

ओम के नियम से रिजिस्टर का रेजिस्टेंस निकालना जब किसी विधुत परिपथ में धारा और वोल्टेज दिया होता हैं तब हम ओम के नियम का उपयोग करके रेजिस्टेंस निकाल सकते हैं

R=V/I

प्रतिरोध कैसे काम करता हैं

इसको समझना आसान है। ऐसी कई चीजें होती है, जिसमे करंट नही गुजर पाता है। जैसे- कोई लकड़ी या प्लास्टिक और कुछ पदार्थ ऐसे होते है, जिनमे करंट फ्लो हो जाता है, जैसे- कॉपर, अलुमिनियम। इनमे आसानी करंट से गुजर जाता है, इसलीए इनको हम वायर के लिए उपयोग लेते है।

अभी हमको सिर्फ यह याद रखना है। जिन चीज़ों में से करंट गुजर जाता है, उसको हम कंडक्टर कहते है। और जो करंट चीज़े को बहने नही देते, उसको हम इंसुलेटर कहते है।

अब हमे यह पता चल गया है की, कंडक्टर हमारे करंट के बहने का एक रास्ता होता है। और अगर हम इस करंट के रास्ते को खराब कर दे, तो करंट को गुजरने में मुश्किल होगी जिसके कारण करंट की स्पीड कम हो जाएगी। तो यही चीज़ रेसिस्टर के अंदर की जाती है।

Resistor को जब बनाया जाता है। तब सबसे पहले एक कंडक्टर वायर को लेते है, जो की हमको रेसिस्टर के दोनो साइड बाहर निकले हुए भी दिखते है। पर इस वायर को बीच में से ब्रेक मतलब तोड़ दिया जाता है। और बीच की जगह पर कार्बन को भर दिया जाता है। Resistor में कार्बन के उपयोग के कारण करंट को गुजरने में तकलीफ होती है, और करंट की स्पीड कम हो जाती है।

Resistance के उपयोग

दोस्तो हमारे सभी इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की एक ताकत होती है, की वह ज्यादा से ज्यादा कितने करंट को सहन कर सकते है।

अगर उस उपकरण की ताकत से ज्यादा करंट उसमे चला जाता है तो वह पूरी तरह से खराब हो जाएगा।

  • Carbon composition
  • Carbon pile
  • Carbon film
  • Printed carbon resistor
  • Thick and thin film
  • Metal film
  • Metal oxide film
  • Wire wound
  • Foil resistor
  • Ammeter shunts
  • Grid resistor
  • विशेष प्रकार के प्रतिरोध
  • Cermet
  • Phenolic
  • टैंटलम
  • जल प्रतिरोध (Water resistor)
  • परिवर्ती मान वाले प्रतिरोध (Variable resistors) संपादित करें
  • Adjustable resistors
  • Potentiometers
  • Resistance decade boxes
  • Special devices

इनका उपयोग कई जगहों पर Electrical परिपथ और Devices में किया जाता है जैसे की –

किसी भी सर्किट में करंट की लिमिट को कंट्रोल करने के लिए रेसिस्टर का उपयोग किया जाता हैं।

किसी भी सर्किट में वोल्टेज को रिड्यूस करने के लिए रेसिस्टर का उपयोग किया जाता हैं।

इलेक्ट्रिकल डिवाइस में रेसिस्टर का उपयोग timing Cycle को Control करने के लिए किया जाता हैं।

इलेक्ट्रिकल सर्किट में ट्रांसमिशन लाइन को Terminate करने के लिए भी रेसिस्टर का उपयोग किया जाता हैं।

उदाहरण- हमारे पास एक LED बल्ब हैं, और हमे उसको start करना हैं। इसके लिए सबसे पहले हम यह चेक करेंगे की वह कितने करंट और वोल्टेज के लिए बना हैं।

अब अगर हमारे पास LED की कैपेसिटी से ज्यादा की बैटरी हैं, तो हम बीच में एक resistor का उपयोग कर लेंगे ताकि बैटरी से निकलने वाले एक्स्ट्रा करंट को resistor रोक दे, और हमारी LED आसानी से जलने लगे।

Resistor कैसे काम करता है

जब resistor को किसी circuit मे लगाया जाता है। और power supply on की जाती है तो यह वोल्टेज को drop करता है जिससे की output कम मिलता है। ओर resistor का resistance temperature बढ़ने पर बड़ जाता है।

रेसिस्टर कैसे काम करता है

आइये दोस्तों अब जानते है की एक resistor काम कैसे करता है? सबसे पहले हम आपको बता दें की जब भी किसी को Resistance की value जाननी होती है. वो भी Electric या Electronic Circuits से तब आपको Resistor की ज़रूरत पड़ती है.

ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि resistor को circuits के साथ जोड़ करके current की value को कम किया जा सके. भले ही ऊपर से देखने पर सभी resistor एक जैसे ही दीखते हो.

मगर सच तो यह है की अंदर से वे सभी resistor different होते है. इससे समझने और जानने के लिए सबसे पहले आपको उसके ऊपर मौजूद outer coating को हटाना पड़ता है. जोकि एक तरह का insulating paint होता है.

उसे हटाने के बाद आपको उसमे insulating ceramic rod देखने को मिलता है जोकि उसके बीच में होता है. उसके ठीक चारो तरफ से copper wire लपेटा हुआ होता है.

इस तरह के सभी resistor को wire-wound कहा जाता है. Insulating ceramic rod के ठीक चारो तरफ जो copper turns होते है. इन copper turns के number से हमे यह पता चलता है की resistance कितने value का है.

Resistor के अन्दर copper wire जितना पतला और जितना ज्यादा copper turns हो. तो इसका सीधा सा मतलब यह है की उसकी उतना ही ज्यादा resistance होगा

रेसिस्टर का उपयोग

Resistor size में बहुत छोटे होते है, जिसकी वजह से इनका use हर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े electric circuit board में होता है. इसके अलावा चूँकि इनका price भी बहुत कम होता है, क्योकि रेसिस्टर का basic material बहुत ही सस्ते में मिल जाता है.

आकार में छोटे होने की वजह से इन्हें एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाना काफी आसान होता है. इसके अलावा resistor को चलाने के लिए किसी भी तरह के बाहरी voltage की जरुरत नहीं पड़ती है. जिसकी वजह से बहुत कम मात्रा में उर्जा की खपत होती है.

Resistors Connection

किसी भी सर्किट में हम रेसिस्टर को दो तरह से कनेक्ट कर सकते हैं एक सीरीज और दूसरा पैरेलल दोनों तरीके अलग-अलग हैं और इनमें रेसिस्टर की वैल्यू बदल जाती हैं, दोनों तरह के कनेक्शन करने पर इसकी रेजिस्टेंस वैल्यू आप नीचे दिए हुए फार्मूला से निकाल सकते हैं।

Series Connection

R = R1 + R2 + R3 + …

Req= R1 + R2 + …………….. Rn

अगर आपने एक सर्किट में सभी रजिस्टर को क्रमबद्ध यानी की सीरीज में लगा दिया हैं तो उनका रजिस्टेंस आपस में जोड़कर सभी प्रतिरोध का कुल रजिस्टेंस आ जाएगा।

Parallel Connection

1 / R = 1 / R1 + 1 / R2 + 1 / R3 +…

अगर आपने सभी प्रतिरोध को समानांतर लगा दिया है तो इनका रजिस्टेंस निकालने के लिए आपको ऊपर दिया गया फार्मूला लगाना पड़ेगा।

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