Optocoupler क्या हैं इसका इतिहास, प्रभाव और उपयोग

हेलो दोस्तो, आज के इस आर्टिकल में हम Optocoupler की समस्त जानकारी पढ़ने वाले हैं तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें।

पिछले पेज पर हमने Thermistor की जानकारी शेयर की हैं तो इस आर्टिकल को भी पढ़े। चलिए आज हम Optocoupler की जानकारी को पढ़ते और समझते हैं।

Optocoupler क्या होता हैं

Optocoupler एक इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट हैं। जो किसी Electrical Signal को Light के माध्यम से एक सर्किट से दूसरे सर्किट में भेज सकता हैं।

optocoupler symbol

जो पहले सर्किट से आइसोलेटेड हो। इस प्रकार यह दो अलग-अलग वोल्टेज पर स्थित सर्किट के बीच Signal का आदान-प्रदान कर सकता है। इसलिए इसका काम Isolation का है। Optocoupler या Opto Isolation भी कहते हैं।

यह LED और ट्रांजिस्टर का मिश्रण होता हैं इसका प्रयोग ज्यादा करंट स्विचिंग के लिए किया जाता है।

इसमे चार पिन होती है जिसमे 2 पिन ट्रांजिस्टर के होते है और दो पिन डायोड के होते हैं।

4 पिन वाले Optocoupler

4 pin optocoupler

6 पिन वाले Optocoupler

6 pin optocoupler

8 pin वाले Optocoupler

8 pin optocoupler

Optocoupler सर्किट में लगे हुये

optocoupler connection

Optocoupler का इतिहास   

एक ठोस-अवस्था प्रकाश उत्सर्जक को एक अर्धचालक Detector से युग्मित करके Isolation प्राप्त करने का महत्व 1963 में समझ में आया था। 1968 में प्रकाश-प्रतिरोधक पर आधारित प्रकाश-युग्मक निर्मित किये गये।

Optocoupler की क्रियाविधि

सबसे सामान्य Opto-isolator में एक Light Emitting Diode (LED) तथा एक Phototransistor होता है। ये दोनों एक ही Opaque पैकेज के अन्दर निर्मित होते हैं।

Light isolators का उपयोग Transmit Digital Signals (on-off) के संचार के लिये किया जाता है पर कुछ विधियों का उपयोग करके इन्हें Transmit Digital Signals के साथ भी काम में लिया जा सकता है।

Optocoupler कैसे काम करता हैं।

optocoupler working

Optocoupler में एक Light Emitting Diode (LED) और एक Transistor होता हैं। इन दोनों को मिला कर Optocoupler बनता हैं।

Optocoupler में पिन 1और पिन 2 में LED लगा होता हैं तथा पिन 3 और पिन 4 में transistor लगा होता हैं जैसा कि आप ऊपर डायग्राम में देख रहे होंगे।

इसमे LED लगा होता हैं वो नार्मल LED होता हैं और Transistor लगा होता हैं वह Phototransistor होता हैं।

इसमे ट्रांजिस्टर में 3 पिन होती हैं Emitter, Collector और Base लेकिन Base में एक Sensor लगा होता हैं जब हम LED पर Light Connection इनपुट देते हैं तो LED Glow होती हैं और उसमें से जो प्रकाश निकलता हैं।

वह प्रकाश ट्रांजिस्टर पर पड़ता हैं प्रकाश पड़ने से Emitter करंट Flow करना चालू कर देता हैं मतलब एमिटर काम करने लगता हैं।

लेकिन हमें ट्रांजिस्टर को भी इनपुट देनी होती हैं आपको LED ओर ट्रांजिस्टर दोनों पर इनपुट देनी होती हैं तभी Optocoupler काम करता हैं।

Optocoupler को कैसे चेक करें

Optocoupler को मल्टीमीटर से चेक करने के लिए सबसे पहले मल्टीमीटर को Diode मोड पर सेट करना होता हैं।

अब Optocoupler की LED को पहले चेक करते हैं उसके लिए पिन 1 जो Anode हैं उस पर रेड प्रोब रखेगे और पिन 2 जो Cathode हैं उस पर ब्लैक प्रोब रखेगें अब आप मल्टीमीटर में देखेंगे तो कुछ रेजिस्टेंस वैल्यू आएगी।

फिर आप प्रोब को बदल कर देखेगे एनोड पर ब्लैक प्रोब और कैथोड पर रेड प्रोब रखेगे तो मल्टीमीटर में कोई भी वैल्यू नही आएगी मतलब 0L लिखा आयेगा।

अब आप दूसरे तरफ चेक करेगे मतलब ट्रांजिस्टर को चेक करेगे।

एमिटर पर ब्लैक प्रोब और कलेक्टर पर रेड प्रोब तो कुछ भी वैल्यू नही आएगी फिर आप प्रोब बदल कर देखे एमिटर पर रेड प्रोब और कलेक्टर पर ब्लैक प्रोब तो भी वैल्यू नही आएगी।

क्योंकि ट्रांजिस्टर को चेक करने के लिए बेस की जरूरत पड़ती हैं।

मतलब आपका Optocoupler ठीक हैं।

Open Condition – जब आप डायोड चेक करते हैं और आपकी वैल्यू नही आती हैं दोनों की तरफ प्रोब बदलने पर भी तो आपका Optocoupler Open हैं।

Shot Condition – जब आप डायोड चेक करते हैं और आपकी वैल्यू दोनों तरफ आती हैं प्रोब बदलने पर भी तो आपका Optocoupler शॉट हैं।

एक बार वैल्यू आएगी और एक बार नही आएगी तो आपका Optocoupler ठीक हैं।

और ट्रांजिस्टर में दोनों तरफ कोई भी वैल्यू नही आएगी।

Optocoupler के प्रभाव

  • सिग्नल से इलेक्ट्रिकल शोर को दूर करता हैं।
  • बड़े AC वोल्टेज को कंट्रोल करने के लिए छोटे डिजिटल सिग्नल के उपयोग की अनुमति देंता हैं।
  • लो-वोल्टेज डिवाइस को हाई-वोल्टेज सर्किट से अलग करते हैं डिवाइस वोल्टेज (उदा: रेडियो फ़्रीक्वेंसी ट्रांसमिशन, लाइटनिंग स्ट्राइक और पावर सप्लाई) से होने वाले व्यवधानों से बचने में सक्षम होता है।

Optocoupler Applications

Optocouplers और Opto-isolators का उपयोग अपने दम पर किया जा सकता हैं या अन्य बड़े इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की एक श्रृंखला को स्विच करने के लिए जैसे कि ट्रांजिस्टर और ट्राइक कम वोल्टेज नियंत्रण सिग्नल के बीच आवश्यक विद्युत Isolation प्रदान करते हैं

उदाहरण के लिए एक Arduino या माइक्रो-कंट्रोलर से, और बहुत अधिक वोल्टेज या मेन करंट आउटपुट सिग्नल।

Optocoupler के लिए सामान्य अनुप्रयोगों में माइक्रोप्रोसेसर इनपुट/आउटपुट स्विचिंग, DC और AC पावर कंट्रोल, PC संचार, सिग्नल Isolation और पावर सप्लाई शामिल हैं।

जो वर्तमान ग्राउंड लूप आदि से ग्रस्त हैं। transmit किया जा रहा की इलेक्ट्रिकल सिग्नल या तो एनालॉग (Linear) हो सकता है या डिजिटल (Pulses) हो सकता हैं।

इस एप्लिकेशन में, ऑप्टोकॉप्लर का उपयोग स्विच या किसी अन्य प्रकार के डिजिटल इनपुट सिग्नल के संचालन का पता लगाने के लिए किया जाता है।

यह तब उपयोगी होता है जब स्विच या सिग्नल का पता लगाया जा रहा होता है जो विद्युत रूप से शोर वाले वातावरण में है।

आउटपुट का उपयोग बाहरी सर्किट, प्रकाश या PC या माइक्रोप्रोसेसर के इनपुट के रूप में संचालित करने के लिए किया जा सकता है

Optocoupler के उपयोग

Optocouplers को बहुत से सर्किट में उपयोग किया जाता हैं।

  • Optocouplers का लेपटॉप में उपयोग होता हैं।
  • Optocouplers का SMPS में उपयोग होता हैं।
  • Optocouplers का उपयोग लेपटॉप के अडॉप्टर में होता हैं।
  • Optocouplers का उपयोग मोबाइल चार्जर में होता हैं।
  • Optocouplers का उपयोग सर्किट की सेफ्टी के लिए करते हैं।
  • यह वाल्व या मोटर को कंट्रोल करता हैं।
  • उच्च वोल्टेज सर्किट के साथ Interfacing के लिए Microcontrollers.

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उम्मीद हैं दोस्तों यह आर्टिकल आपने पूरा पढ़ा होगा और अब आपको समझ आ गया होगा की Optocoupler क्या होता हैं और कैसे काम करता हैं। अगर आपको इससे संबंधित कोई भी जानकारी चाहते हैं तो आप नीचे Comment करके हमसे पूछ सकते हैं।

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