Modulation की परिभाषा, प्रकार, आवश्यकता और अंतर

इस आर्टिकल में आप Modulation की जानकारी पढ़ने वाले हैं जिसमे मॉडुलेशन क्या है, मॉडुलेशन के प्रकार और मॉडुलेशन की आवश्यकता आदि की समस्त जानकारी को आप एक-एक करके पढ़ेंगे

पिछले पेज पर हमने Voltage Regulator  की जानकारी शेयर की हैं यदि आपने उस पोस्ट को नहीं पढ़ा तो उसे भी जरूर पढ़े। चलिए आज हम Modulation की समस्त जानकारी को पढ़ते और समझते हैं।

Modulation क्या हैं

यह किसी जानकारी (Information) को लम्बी दूरी तक सिग्नल के रूप में भेजने के लिए उपयोग होता है।

मॉडुलेशन डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल के रूप में बदलने की प्रक्रिया है। यह मॉडम (Modem, Modulator या Demodulator) के द्वारा संभव होता है।

मॉडम एक विद्युत यंत्र है जो डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में बदलकर भेजता है, तथा एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में बदलकर प्राप्त करता है। 

Modulation क्या होता है

Modulation एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें Carrier सिग्नल के एक या एक से अधिक पैरामीटर्स को बदल दिया जाता है। जैसे Amplitude, Frequency तथा Phase यह पैरामीटर्स होते हैं।

दूसरे शब्द में कहे तो मोड्यूलेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कम Frequency के सिग्नलों को अधिक Frequency के सिग्नलों में बदला जाता है या मोड्यूलेटेड किया जाता है।

इन सिग्नलों को मोड्यूलेटेड इसलिए किया जाता है क्योंकि ये कम फ्रीक्वेंसी सिग्नल होते है मतलब इनकी उर्जा कम होती है जो ज्यादा दुरी तक नहीं पहुँच पाते है। जिससे जो सिग्नल होता है वह बीच में ही नष्ट हो जाता है। तथा Receiver तक नहीं पहुँच पाता है।

मोड्यूलेशन की क्रिया मोड्यूलेटर के द्वारा की जाती है।

Modulation के प्रकार

मॉडुलेशन तीन प्रकार के होते हैं।

  1. Amplitude Modulation (AM)
  2. Frequency Modulation (FM)
  3. Phase Modulation (PM)

1. Amplitude Modulation

Amplitude Modulation को हिंदी में आयाम मॉडुलन कहते हैं।

यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें Carrier Signal का Amplitude मैसेज सिग्नल के अनुरूप बदल जाता है। पर Phase और Frequency फिक्स या Constant रहती है वह बदलते नहीं हैं।

इसमें Binary Signals (0 और 1) के लिए दो आयाम निर्धारित किए जाते हैं। इसमें एनालॉग सिग्नल के  अनुसार बदला जाता है जबकि Frequency और Frequency फिक्स और कांस्टेंट रहते हैं।

2. Frequency Modulation

Frequency Modulation को हिंदी में आवृत्ति मॉडुलन कहते हैं।

यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें Carrier Signal की Frequency मोड्यूलेट होती है। इसमें Amplitude और Phase सामान रहते है वह बदलते नहीं है।

एनालॉग सिग्नल की आवृत्ति को डिजिटल सिग्नल (0 और 1) के अनुसार बदला जाता है जबकि Amplitude और फेस Constant रहते हैं।

3. Phase Modulation

Phase Modulation को हिंदी में चरण मॉडुलन कहते हैं।

यह एक ऐसा मोड्यूलेशन है जिसमें Carrier Signal का Phase बदल जाता है तथा जब सिग्नल का फेज बदलता है तो इससे फ्रीक्वेंसी भी बदलती है। इस कारण से यह मोड्यूलेशन Frequency Modulation के अन्दर ही आता है।

इसमें एनालॉग सिग्नल के Phase को डिजिटल सिग्नल के अनुसार बदला जाता है जबकि Amplitude और Phase Constant रहता है कंप्यूटर नेटवर्क में Data Transmission के लिए Phase Modulation का प्रयोग किया जाता है।

Modulation की आवश्यकता

Modulation की आवश्यकता क्यों पड़ती है आइये आगे पढ़ते हैं।

  • Antenna की ऊँचाई को कम करने के लिए – जब हम ट्रांसमिशन करते है तो हमें बहुत ज्यादा ऊँचाई वाले Antenna को कम करना पड़ता है। आपने देखा होगा कि पहले जो वायरलेस डिवाइस होती थी जैसे – रेडियो, टीवी, तो इनके Antenna की ऊँचाई ज्यादा होती थी पर आज के समय मे जो डिवाइस आती है उनके Antenna की ऊँचाई बहुत छोटी होती है।
  • मल्टीप्लेक्सिंग के लिए – मल्टीप्लेक्सिंग एक समय में एक चैनल द्वारा बहुत सारें सिग्नलों के ट्रांसमिशन की प्रक्रिया है। मोड्यूलेशन के बिना हम मल्टीप्लेक्सिंग नहीं कर सकते हैं।
  •  मैसेज सिग्नल में शोर बहुत ही ज्यादा होता है तो उस शोर को कम करने के लिए मोड्यूलेशन की आवश्यकता होती है।
  • सिग्नल की शक्ति को बढ़ाने के लिए मोड्यूलेशन की आवश्यकता होती है।
  • अधिक दूरी के ट्रांसमिशन को करने के लिए मोड्यूलेशन की आवश्यकता होती है।
  • सिग्नल की Bandwidth को बढाने के लिए मोड्यूलेशन की आवश्यकता होती है।

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