LDR क्या हैं LDR के प्रकार, बनावट, कार्य, लाभ और हानि

इस आर्टिकल में आज हम LDR की समस्त जानकारी पढ़ने वाले हैं यदि आप LDR के बारे में जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढें।

पिछले पेज पर हमने Voltage Regulator की जानकारी शेयर की हैं यदि आपने उस पोस्ट को नहीं पढ़ा तो उसे भी जरूर पढ़े।

चलिए आज हम LDR क्या हैं LDR के प्रकार, बनावट, कार्य, सिद्धांत और अनुप्रयोग की समस्त जानकारी को पढ़ते और समझते हैं।

LDR क्या हैं

LDR का Full form – Light Dependent Resistor होता हैं। और हिंदी में इसका मतलब प्रकाश पर निर्भर प्रतिरोधक होता है। ‌

LDR symbol

LDR एक ऐसा Devices है जिसकी Resistivity Electromagnetic Radiation का कार्य है। इसलिए, वे प्रकाश के प्रति संवेदनशील Devices हैं। उन्हें Photoconductors, Photoconductive सेल या Simply Photocells भी कहा जाता है।

LDR पर जैसे-जैसे लाइट यानी Illumination  का वेरिएशन होता है, वैसे वैसे LDR अपना रेजिस्टेंस Vary करता है। जब LDR पर Illumination नहीं होता तो यह काफी ज्यादा रजिस्टेंस (MegaOhm) ऑफर करता है। 

जैसे-जैसे LDR के ऊपर लाइट डाली जाती है इसका रेजिस्टेंस धीरे-धीरे घटने लगता है। एक सेंसर के लिए यही सबसे ज्यादा खास बात है कि किसी भी इलेक्ट्रिकल मात्रा में बदलाव होना। रेजिस्टेंस के बदलाव को हम अपने अनुसार Configure करके अलग अलग एप्लीकेशन में उपयोग कर सकते हैं।

LDR के प्रकार

Photo-resistors या LDR को दो प्रकार में बांटा गया हैं।

  1. Intrinsic photo-resistors
  2. Extrinsic Photo-resistors

1. Intrinsic photo-resistors 

यह सिलिकॉन और जर्मेनियम जैसे शुद्ध सेमीकंडक्टर से बने होते हैं। इलेक्ट्रॉन्स Valence Band से लेकर Conduction Band तक उत्तेजित हो जाते हैं जब उस पर पर्याप्त ऊर्जा के फोटॉन गिरते हैं और Number Charge Carriers बढ़ जाते हैं।

2. Extrinsic Photo-resistors

ये सेमीकंडक्टर पदार्थ हैं जिन्हें अशुद्धियों से डोप किया जाता है जिन्हें Dopants कहते है। ये डोपेंट Valence Band के ऊपर नए Energy Bands बनाते हैं। 

जो इलेक्ट्रॉनों से भरे होते हैं। इसलिए यह bandgap को कम करता है और रोमांचक ऊर्जा में कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 

Extrinsic Photo Resistors का उपयोग लंबे Wavelengths के लिए किया जाता है।

LDR की बनावट 

LDR एक Light Sensitive Material की एक पतली Strip का बना होता है जिसके दो टर्मिनल होते हैं।

यह Light Sensitive Material (cds) को एक Ceramic Base पर Zig-Zag आकार में जमा कर दिया जाता है जिससे cds का क्षेत्रफल बढ़ जाता है।

जिससे इसके Resistance को Control किया जा सके। इस Light Sensitive Material (cds) के दोनों सिरों पर बाहरी लीड द्वारा Metal Contact लगाया जाता है।

इस पूरी संरचना को अब प्लास्टिक की दीवार में सील कर दिया जाता है, जिसके ऊपर एक पारदर्शी प्लास्टिक की खिड़की होती है जो प्रकाश को संरचना में प्रवेश करने देती है।

LDR के Characteristics

LDR के प्रकाश पर निर्भर उपकरण हैं यह प्रतिरोध और प्रकाश की तीव्रता के बीच होता है। इसमें जब प्रकाश की तीव्रता बहुत कम होती है, तब LDR का Resistance बहुत ज्यादा होता है, जैसे-जैसे प्रकाश की तीव्रता को बढ़ाते है, LDR का रेजिस्टेंस कम होता जाता है।

जब प्रतिरोध में कमी आती है तब प्रकाश उस पर पड़ता है और यह अंधेरे में बढ़ जाता है। जब एक प्रकाश आश्रित प्रतिरोधक को अंधेरे में रखा जाता है।

तो इसका रेजिस्टेंस बहुत अधिक होता है। इस रेसिस्टेन्स को अंधेरे प्रतिरोध के रूप में कहा जाता है।  

यह ऊंचा हो जाता है और अगर डिवाइस को प्रकाश का कहना अवशोषित करने की अनुमति है, तो इसका प्रतिरोध बहुत कम हो जाएगा। 

यदि इस पर एक लगातार वोल्टेज दिया जाये तो प्रकाश की तीव्रता बढ़ जाती है और करंट भी बढ़ने लगता है। 

LDR की जानकारी        

हमारे चारो तरफ बहुत सारे ऐसे डिवाइसेज होते हैं जो कि लाइट के इंटेंसिटी को डिटेक्ट कर के काम करते हैं।

Example – आप अपने मोबाइल फोन की बात करें तो आपने देखा होगा कि आपके फोन की ब्राइटनेस ऑटोमेटिक मोड कैसे कम लाइट में खुद से ही कम हो जाती है और लाइट ज्यादा होती है या धूप होती है तब आपका फोन अपने आप ब्राइटनेस को बढ़ा देता है

और इस तरह कम लाइट और ज्यादा लाइट में भी आप अपने फोन में साफ देख पाते हैं। यह लाइट सेंसर से ही होता है। फोन में एक लाइट सेंसर होता है जो बाहर का Illumination Continuously मॉनिटर करता रहता है और एक प्रोग्राम के According उसे कंट्रोल करता है। आगे पढ़ते हैं कि लाइट सेंसर कैसे काम करता है। 

लाइट सेंसर क्या है

Sensor का काम है किसी भी Physical Quantity  को Electrical Quantity में बदलना होता हैं। ताकि हम उसे Electronic Form में प्रोसेस कर पाए. इसी तरह लाइट सेंसर, लाइट की एनर्जी को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलता है।

 हर प्रकार के लाइट सेंसर उपलब्ध होते है। उसके उपयोग करने से पर सबसे सरल और सस्ता उपाय LDR होता हैं।

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LDR का कार्य सिद्धांत

Photo-resistor, Photoconductivity के सिद्धांत के आधार पर काम करता है। फोटो चालकता एक Optical घटना है जिसमें सामग्री की चालकता बढ़ जाती है जब प्रकाश सामग्री द्वारा अवशोषित होता है।

जब फोटोन डिवाइस पर गिरते हैं, तो सेमीकंडक्टर सामग्री के Valence Band में इलेक्ट्रॉनों चालन बैंड के लिए उत्साहित होते हैं। घटना प्रकाश में इन फोटॉनों में सेमीकंडक्टर सामग्री के Band Gap से अधिक ऊर्जा होनी चाहिए ताकि इलेक्ट्रॉनों को Valence Band से Conduction Band तक Jump कर सकें।          

इसलिए जब प्रकाश में डिवाइस पर पर्याप्त ऊर्जा होती है, तो अधिक से अधिक इलेक्ट्रॉन चालन बैंड से उत्साहित होते हैं जिसके परिणाम स्वरूप बड़ी संख्या में चार्ज वाहक होते हैं।

इस प्रक्रिया का परिणाम ज्यादा से ज्यादा चालू होता है जब सर्किट बंद हो जाता है और डिवाइस के माध्यम से बहाव शुरू होता है और डिवाइस का प्रतिरोध कम हो जाता है। इसलिए यह LDR का सबसे सामान्य कार्य सिद्धांत है।

LDR के अनुप्रयोग

  • LDR का उपयोग Light Sensor के रूप में किया जाता है।
  • इसमे कैमरे के प्रकाश मीटर में प्रकाश की उपस्थिति या अनुपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है।
  • इसमें मुख्य रूप से Alarm Clock, Street Light, Light Intensity Meter, Burglar Alarm Circuit का उपयोग किया जाता हैं।
  • इसका उपयोग तीव्रता नियंत्रित स्ट्रीट लाइट्स के संरक्षण के लिए एक परियोजना को समझाया है।

LDR के लाभ 

  • LDR को Operate करने के लिए कम वोल्टेज की जरूरत पड़ती है। 
  • LDR का कम Cost और Simple संरचना होती है।

LDR की हानि

IC Application के लिए उपयुक्त नहीं है।

उम्मीद हैं मेरे द्वारा दी गई LDR की जानकारी आपको पसंद आयी होगी।

यदि आपको LDR की जानकारी पसंद आयी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर करें।

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