IGBT क्या हैं इसके प्रकार, संरचना, गुण, उपयोग और विशेषताएं

इस पेज पर आज हम IGBT (Insulated Gate Bipolar Transistor) की समस्त जानकारी पढ़ने वाले हैं तो इस आर्टिकल को  पूरा जरूर पढ़े।

पिछले पेज पर हमने Integrated Circuit की जानकारी शेयर की हैं यदि आप IC की जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को भी पढ़े।

चलिए आज हम IGBT क्या हैं इसके प्रकार, संरचना, गुण, उपयोग, लाभ, हानि और विशेषताएं की समस्त जानकारी पढ़ते और समझते हैं।

IGBT क्या हैं

IGBT का Full form – Insulated Gate Bipolar Transistor होता हैं।

इंसुलेटेड गेट बाइपोलर ट्रांजिस्टर एक सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रिकल डिवाइस हैं जिसका उपयोग आधुनिक पावर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में फ़ास्ट स्विच के रूप में किया जाता हैं।

इसके तीन टर्मिनल होते हैं। 

  1. Collector
  2. Gate
  3. Emitter

IGBT symbol

इसमें Gate टर्मिनल Insulated होता है। यह डिवाइस BJT (Bipolar Junction Transistor) और MOSFET (Metal Oxide Semiconductor Field Effect Transistor) के मिश्रण से बनाया जाता है।

BJT का कलेक्टर और एमिटर और मॉस्फेट का गेट टर्मिनल को आपस में मिलाकर IGBT बनाया जाता है। 

IGBT symbol

इसमे से एमिटर और कलेक्टर ट्रांज़िस्टर के नाम से है और गेट मॉस्फेट से लिया गया है। यह 1 kv वोल्टेज पर भी काम करता है और 500 से 100 amps करंट को सहन कर सकता हैं।

लेकिन इसकी स्विचिंग स्पीड मध्यम होती हैं क्योंकि ट्रांजिस्टर की स्विचिंग स्पीड कम होती है और मॉस्फेट की स्विचिंग स्पीड सबसे अधिक होती हैं।

Insulated Gate Bipolar Transistor वोल्टेज को कंट्रोल करता है और मॉस्फेट भी वोल्टेज को ही कंट्रोल करता है। जबकि ट्रांज़िस्टर करंट को कंट्रोल करता हैं।

इसका प्रयोग वहाँ किया जाता है जहाँ ज्यादा लोड वाले उपकरण लगे होते है जैसे Generator, Lift, smps, Variable Frequency Drive, Traction motor control और घरो में उपयोग होने वाले इंडक्शन कुकर में इसका प्रयोग किया जाता हैं।

ये ट्रांज़िस्टर और मॉस्फेट से महँगा होता है इसके गेट पर जैसे जैसे करंट बढ़ाया जाता है वैसे ही आउटपुट वोल्टेज बढ़ता जाता है लेकिन ये एक सीमा तक ही बढ़ाया जा सकता हैं।

IGBT को हिन्दी मे अछूता गेट द्विध्रुवी ट्रांजिस्टर करते हैं।

IGBT के विभिन्न प्रकार

IGBT बहुत से आकर की होती हैं आप नीचे चित्र में देख सकते हैं।

IGBT Type

कुछ बड़े आकार के भी IGBT होते हैं जैसा कि आप नीचे चित्र में देख पा रहे हैं।

IGBT

IGBT की संरचना

MOSFET के लिए दिए गए नामों की तुलना में तीन टर्मिनलों को दिए गए नाम थोड़े अलग हैं। सोर्स एक एमिटर बन जाता है और Drain एक कलेक्टर बन जाता है।

इलेक्ट्रॉन एक IGBT के माध्यम से उसी तरह से प्रवाह करते हैं जैसे कि उन्होंने एक पावर मॉस्फेट में किया था। और p+ क्षेत्र से होल n क्षेत्र में फैलते हैं, इलेक्ट्रॉनों द्वारा अनुभव किए गए प्रतिरोध को कम करते हैं। यह IGBT को अधिक उच्च वोल्टेज के साथ उपयोग करने के लिए उपयुक्त बनाता है।

IGBT structure

अभी दो pn जंक्शन हैं, और इसलिए यह IGBT को बाईपोलर जंक्शन ट्रांजिस्टर (BJT) के कुछ गुण प्रदान करता है। ट्रांजिस्टर प्रॉपर्टी होने के कारण IGBT को पावर मॉस्फेट की अपेक्षा ज्यादा समय तक स्विच करने में समय लगता है, यह अभी भी BJT द्वारा लिए गए समय से अधिक तेज़ है।

कुछ समय पहले BJTs ट्रांजिस्टर का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला प्रकार था। आजकल, मॉस्फेट ट्रांजिस्टर का सबसे कॉमन प्रकार है। उच्च-वोल्टेज अनुप्रयोगों के लिए IGBT का उपयोग भी काफी सामान्य है।

जब इसे Source पर Voltage Apply किया जाता है जो एक Power MOSFET के समान है। p+ सब्सट्रेट को छोड़ कर, IGBT का Silicone Cross Section  लगभग एक Power MOSFET के समान होता है।

IGBT का काम पावर मॉस्फेट की तुलना में BJT के बहुत मिलता है, क्योंकि फॉरवर्ड Direction में, इसकी विशेषताएँ Bipolar Junction Transistor से मिलती हैं और ऐसा p+ सब्सट्रेट की उपस्थिति के कारण होता है।

जो एक PN-जंक्शन (p+ सब्सट्रेट और n- बहाव) बनाता है। इसलिए, यह एक Voltage Controlled उपकरण है जो इनपुट वोल्टेज VGE द्वारा नियंत्रित होता हैं।

IGBT की विशेषताएं

नीचे दिया गया डायग्राम n चैनल IGBT की स्थिर I-V विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है I-V IGTB की विशेषताएं

IGBT characteristics

ऊपर दिए गए ग्राफिकल प्रतिनिधित्व से, यह स्पष्ट है कि हमने गेट एमिटर वोल्टेज VGE के विभिन्न मूल्यों के लिए कलेक्टर वर्तमान IC और कलेक्टर-एमिटर वोल्टेज VCE के बीच कर्वे प्लॉट किया है। यह दर्शाता है कि IGTB एक वोल्टेज कंट्रोल्ड डिवाइस है।

गेट एमिटर वोल्टेज की अनुपस्थिति में, जंक्शन J2 की रिवर्स बायस्ड स्थिति के कारण डिवाइस से कोई करंट प्रवाहित नहीं होता है। 

जब IGTB को गेट एमिटर वोल्टेज प्रदान किया जाता है, तब भी यदि आपूर्ति की गई वोल्टेज थ्रेशोल्ड मान से कम है, तो भी डिवाइस के माध्यम से करंट का कोई प्रवाह नहीं होगा, इस प्रकार यह ऑफ-स्टेट में है। 

लेकिन थ्रेशोल्ड से ऊपर VGE के विभिन्न मूल्यों के लिए डिवाइस के माध्यम से अलग-अलग करंट प्रवाहित होता है।

IGBT के गुण

IGBT में निम्नलिखित गुण होते हैं।

  • इसमें MOSFET की स्थिति में हाई impedance गेट होता है।
  • IGBT के पास BJT की स्थिति में low ON-OFF वोल्टेज पर काम करता है।
  • यह GTO (Gate Turn Off Thyristor)  की स्थिति में नेगेटिव वोल्टेज को रोक सकता है।
  • IGBT में Gate Drive सिम्पल और हाई स्विचिंग स्पीड पर काम करता है।
  •  इसमें पावर सर्किट इंटीग्रेशन की क्षमता और निंदनीय ऑपरेशन होता है। 
  • इसमे सामान्य रूप से AC मोटर ड्राइव, UPS सिस्टम, स्विच्ड मोड पावर सप्लाई (SMPS), 600V, 50A में डिवाइस के लिए केवल 3.2 वोल्ट के ON वोल्टेज की जरुरत होती है।

IGBT के उपयोग

IGBT का उपयोग उन डिवाइस में होता हैं जिन्हें उनके संचालन के लिए मध्यम शक्ति की आवश्यकता होती हैं।

आजकल IGBT का उपयोग बहुत से सर्किट में किया जाता है। जैसे कि UPS सिस्टम, VFD (Variable Frequency Drive) में, पावर सप्लाई, AC के साथ-साथ DC मोटर ड्राइव, एयर कंडीशनर में, इलैक्ट्रीक कार, ट्रेन आदि में IGBT का उपयोग किया जाता है।

IGBT के लाभ

  • यह तेज स्विचिंग गति प्रदान करता है।
  • On-State रेजिस्टेंस काफी कम होता है।
  • इसमें उच्च वोल्टेज क्षमता होती है।
  • प्रकृति में द्विध्रुवी इस प्रकार बढ़ा हुआ चालन प्रदान करता है।
  • कम स्विचिंग नुकसान इसके साथ जुड़े हुए हैं।
  • यह BJT और MOSFET की तुलना में अधिक दक्षता प्रदान करता है।

IGBT के हानि

  • यह MOSFETs की तुलना में Relatively अधिक Turn-off समय प्रदान करता है।
  • Latch-up समस्या डिवाइस के अत्यधिक बिजली अपव्यय का कारण बन सकती है जिससे इसे नष्ट कर दिया जा सकता है।

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