Data Transmission क्या हैं इसके प्रकार और उदाहरण

हेलो दोस्तों, आज के आर्टिकल में हम Data Transmission की समस्त जानकारी पढ़ने वाले हैं तो पोस्ट को पूरा जरूर पढ़िए।

पिछले पेज पर हमने Modulation की जानकारी शेयर की हैं यदि आपने उस पोस्ट को नहीं पढ़ा तो उसे भी जरूर पढ़े।

चलिए आज हम Data Transmission क्या हैं इसके प्रकार और उदाहरण की समस्त जानकारी पढ़ते और समझते हैं।

Data Transmission क्या होता हैं

Data Transmission एक ऐसी Process है जिसमें Digital और Analog डाटा को दो या दो से अधिक डिवाइस के मध्य Transfer और शेयर किया जाता है। जो डाटा शेयर होता हैं वो bits के form में होता है। जब हम डाटा को Transfer या शेयर करते हैं।

डाटा को sharing करने का कुछ ना कुछ माध्यम जरूर होता हैं डिवाइस के मध्य डाटा का ट्रांसमिशन (coaxial cable, fiber optic) के द्वारा किया जाता है। डाटा को हम पास और दूर शेयर करने के लिए उपयोग किया जाता हैं।

data transmission

डाटा को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने के लिए जिस सेवा का उपयोग होता है उसे डाटा ट्रांसमिशन सेवा कहते हैं। इस सेवा को देने वाले को डाटा ट्रांसमिशन सेवा अनुदाता कहते हैं। 

जैसे :-

  • VSNL – Videsh Sanchar Nigam Limited.
  • BSNL – Bharat Sanchar Nigam Limited.
  • MTNL – Mahanagar Telephone Nigam Limited.

Data Transmission के प्रकार

  1. parallel data transmission
  2. serial data transmission

Data transmission type

1. Parallel Data Transmission

Parallel data transmission में, Data की सभी bits को एक ही समय पर एक साथ अलग-अलग Communication Lines के द्वारा Transmit किया जाता है, जैसे की यदि हमे n bits डाटा को transfer करना हैं तो हम n communication lines का use करेंगे मतलब की हम जो भी bits transfer करेंगे उसी Lines का use करेंगे।

डाटा Transfer के लिए इसमें Transfer की Speed होती हैं क्योंकि इसमें सभी डाटा बिट्स को एक साथ transfer किया जाता है। इसका उपयोग कम दूरी के कम्युनिकेशन के लिए किया जाता हैं

उदाहरण – Computer के अंदर जो Internal Transfer होता हैं जैसे कंप्यूटर तथा प्रिंटर के मध्य डाटा का ट्रांसमिशन होता हैं तो वह Parallel Transmission ही होता हैं।

Advantage

  • Parallel Transmission में Transfer की Speed होती हैं
  • इसमे Program करना बहुत आसान होता है।

Disadvantage

  • इसकी कीमत अधिक होती है क्योंकि n data bits को transmit करने के लिए हमें n communication line की जरुरत पड़ती है।

2. Serial Data Transmission

Serial data transmission में डाटा बिट्स को क्रम में एक के बाद एक Transmit किया जाता है डाटा को एक सीरियल क्रम में transmit किया जाता हैं।

इसमें sender और receiver के मध्य डाटा Transfer करने के लिए केवल एक communication lines का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इसमें डाटा बिट्स serial वाइज एक लाइन से ही ट्रांसमिट होता है।

इसकी स्पीड कम होती हैं क्योंकि डाटा एक सीरियल में शेयर होता हैं, serial transmission का प्रयोग लम्बी दूरी के ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है।

उदाहरण – Telephone line में Serial Data Transmission का use किया जाता हैं।

Advantage

  • इसकी Speed कम होती हैं
  • इसकी कीमत कम होता है क्योंकि इसमें केवल एक communication लाइन का प्रयोग किया जाता है

Serial Transmission के प्रकार

  • Asynchronous transmission
  • Synchronous transmission

i). Asynchronous transmission

इसमे एक समय में केवल एक ही character को भेज सकते है वह character, number या alphabet हो सकता हैं,  इसमें start तथा stop bits का उपयोग डाटा को Transmit करने के लिए किया जाता है।

start bit Receiver को संकेत करता है कि नए डाटा bits आने वाले है। इस bit को किसी character के transmit होने से पहले ही भेज दिया जाता है।

Start bit की वैल्यू 0 या 1 होती हैं जब value 0 होती हैं तब यह पता चलता है कि character Transfer होने ही वाला है यह Receiver को संकेत करता है और उसे character को रिसीव करने के लिए ready रखता है।

जब value 1 होती हैं तो यह indicate करता है कि communication लाइन बेकार है stop bit यह indicate करता है कि डाटा bits समाप्त हो चुके है मतलब कि यह Receiver को सूचना देता है कि डाटा bits खत्म हो चूका है Normally stop bit की value 1 होती है।

asynchronous transmission के फायदा 

  • इसमें Receiver और sender के मध्य synchronization करने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • इसकी कीमत कम होती है।

ii). Synchronous Transmission

Synchronous transmission में start और Stop bit का उपयोग नहीं किया जाता हैं, इसमें बहुत सारा डाटा एक block में भेजा जाता है और प्रत्येक block में बहुत सारें character होते है।

इसमें clock का उपयोग किया जाता हैं और clock का उपयोग bits भेजने के समय को Control करने के लिए किया जाता है।

Error Less डाटा को receive करने के लिए Receiver और sender दोनों में clock frequency का उपयोग करते हैं।

इस transmission की Speed अधिक होती हैं क्योकि हमे डाटा शेयर करने के लिए start तथा stop bit को नहीं भेजना पड़ता हैं और साथ ही इस Transmission में अधिक characters को हम एक साथ भेज सकते है।

Disadvantages

  • इसकी कीमत asynchronous की तुलना में अधिक होती है।
  • इसमें synchronization होता है जिससे सिस्टम Complex हो जाता है।

डाटा ट्रांसमिशन सेवा

डाटा ट्रांसमिशन सेवा निम्नलिखित हैं।

1. Dial up line

डायल अप लाइन टेलीफोन कनेक्शन से संबंधित है जो एक सिस्टम में बहुत सारे लाइनों तथा यूजरों से जुड़ा है। इसका उपयोग टेलीफोन की तरह नम्बर डायल कर संचार स्थापित करने में किया जाता है।

इसे स्विच्ड लाइन भी कहा जाता है। यह पहले से विद्यमान टेलीफोन सेवा का उपयोग करता है। ब्राडबैंड तकनीक भी डायल अप कनेक्शन के द्वारा ही उपयोग होता है।

2. Digital Subscriber Line (DSL)

यह एक high speed इंटरनेट सेवा है जो cable के माध्यम से ऑन लाइन सुविधा प्रदान करता है। यह डायल अप सेवा की तरह ही कॉपर टेलीफोन लाइन का उपयोग करता है।

परन्तु यह डायल अप सेवा से काफी तेज स्पीड प्रदान करता है। DSL सेवा के लिए DSL मॉडम की आवश्यकता होती है जो टेलिफोन लाइन तथा कम्प्यूटर को जोड़ता है।

3. Leased line

लीज्ड लाइन आवाज और डाटा दूरसंचार सेवा के लिए दो स्थानों को जोड़ती है। यह एक सिर्फ, समर्पित लाइन (Dedicated Cable) नहीं है, बल्कि यह वास्तव में दो बिन्दु के बीच आरक्षित सर्किट है। यह कम या ज्यादा दोनों दूरी में संभव है। इसे समर्पित (Dedicated) लाइन भी कहते हैं।

इसका सबसे अधिक उपयोग उद्योगों द्वारा अपने शाखा कार्यालयों को जोड़ने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह नेटवर्क ट्रैफिक के लिए बैंडविड्थ की गारंटी देता है।

4. Integrated Services Digital Network (ISDN)

एकीकृत सेवा डिजिटल नेटवर्क सर्किट स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क के माध्यम से आवाज, डाटा और छवि का स्थानान्तरण है। इस सेवा के अन्तर्गत आवाज, डाटा या छवि डिजिटल रूप में भेजा जाता है।

अतः शोर से बिल्कुल मुक्त रहता है । इस लाइन में कई उपकरणों को संलग्न किया जा सकता है, और जरूरत के अनुरूप इस्तेमाल किया जा सकता है।

अर्थात् ISDN लाइन लोगों की पूरी संचार व्यवस्था की देखभाल कर सकता है। इस सेवा में मॉडम की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि डाटा का आदान प्रदान डिजिटल रूप में होता है।

5. Network Interface Card (NIC)

यह एक हार्डवेयर डिवाइस है जो कम्प्यूटर को नेटवर्क में संचार स्थापित करने में सक्षम बनाता है। नेटवर्क के अन्तर्गत कम्प्यूटर एक निश्चित प्रोटोकॉल के तहत् डाटा पैकेट का आपस में आदान-प्रदान करते हैं।

6. Wireless Technology

वायरलेस तकनीक जैसा कि नाम से ज्ञात होता है यह बिना तारों (wire) की तकनीक है। अर्थात् इसके द्वारा डेटा का परिवहन बिना तारों या केबल के होता है। इस तकनीक के प्रयोग से केबल के खर्च भी बचत होती है।

इस तकनीक में केबल के स्थान पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों, माइक्रोवेव, इन्फ्रारेड तरंगों आदि के द्वारा डेटा का परिवहन होता है। वायरलेस तकनीक के अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं टेलीविजन रिमोट कंट्रोल, सेलुलर फोन, वाई-फाई आदि। वाई-मैक्स (WiMAX-Worldwide Interoperability for Microwave Access):

यह एक डिजिटल वायरलेस संचार प्रणाली है। यह तकनीक बिना केबल के 75 MB/ सेकंड ब्रॉडबैड स्पीड प्रदान करता है।

7. Wireless Local Loop (WLL)

यह एक वायरलेस संचार प्रणाली है जिसमें उपभोक्ता नेटवर्क से रेडियो आवृत्ति (Radio Frequency) के प्रयोग से जुड़ते हैं। यह बेहतर आवाज तथा उच्च गति डेटा क्षमता प्रदान करता है। जिस स्थान पर लैंडलाइन टेलीफोन कनेक्शन का प्रावधान संभव नहीं है।

वहाँ वायरलेस लोकल लूप तकनीक प्रभावी सेवा है। यह सी डी एम ए (Code Division Multiple Access) पर आधारित है। आजकल यह नेटवर्क के लिए लोकप्रिय साधन है।

जरूर पढ़िए :

आशा हैं आपने Data Transmission का आर्टिकल पूरा पढ़ा होगा। आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें।

Leave a Comment